

When Nietzsche Wept (2007)
वियना के प्रख्यात चिकित्सक, डॉ. जोसेफ ब्रेउर, एक गहरा नैतिक संकट झेल रहे हैं। तभी उनकी मुलाक़ात एक और पीड़ा से जूझ रहे दार्शनिक, फ्रेडरिक नीत्शे से होती है। नीत्शे, निराशा और अस्तित्व के गहन प्रश्नों से जूझ रहे हैं, और डॉ. ब्रेउर को उनकी मदद करने का दायित्व सौंपा जाता है। यह मुलाक़ात केवल एक रोगी और चिकित्सक का संबंध नहीं है, बल्कि दो असाधारण मस्तिष्कों का टकराव है, जो उन्हें अपने आंतरिक राक्षसों का सामना करने और जीवन के अर्थ को पुनर्परिभाषित करने की ओर ले जाता है। उनकी यात्रा, दर्शन और मनोविश्लेषण के बीच एक मोहक रेखा खींचती है। यह एक ऐसी कहानी है जो मानवीय पीड़ा और मुक्ति की तलाश में गहराई से उतरती है।







