

Le Havre (2011)
कभी लेखक रहे मार्सल मार्क्स ने खुद को ले हाव्र के बंदरगाह शहर में गुमनामी में धकेल दिया है, और मोची बनकर जीवन गुज़ार रहा है। लेखन के सपने त्याग चुके मार्सल का शांत जीवन, पत्नी अर्लेटी और शामें एक बार में बीतती हैं। तभी, एक अवैध अफ़्रीकी शरणार्थी के आने से सब उलट-पुलट हो जाता है, और मार्सल को फिर एक बार तलवार थामने की ज़रूरत आन पड़ती है।






