

Faces in the Crowd (2011)
एक भयावह हमले के बाद, अन्ना मार्शांद "फेस ब्लाइंडनेस" से जूझ रही है, चेहरे पहचानने में असमर्थ। एक सीरियल किलर के साये में, वो अपने प्रियजनों को भी नहीं पहचान पाती। हर धुंधली होती छवि के साथ, हत्यारा करीब आता जाता है। इस मनोविकार के तनाव में, अन्ना का संघर्ष एक रहस्यमय दौड़ में बदल जाता है, जहाँ पहचान और अस्तित्व दांव पर लगे हैं।








